भारतीय न्यायप्रणाली में 'जनहित याचिका' (PIL) सामाजिक न्याय और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा का एक अनूठा माध्यम है। इसकी शुरुआत 1980 के दशक में न्यायपालिका द्वारा आम जनता, विशेषकर साधनविहीन वर्गों के हितों की रक्षा हेतु की गई थी। इसके अंतर्गत कोई भी जागरूक नागरिक या संस्था व्यापक जनहित, पर्यावरण संरक्षण अथवा मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों को लेकर सीधे उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है।