गुजरात के पाटन का 'डबल इकत पटोला' भारत की सबसे जटिल और उत्कृष्ट हथकरघा परंपराओं में गिना जाता है। इसमें ताना और बाना दोनों धागों को बुनाई से पहले ही सटीक गणितीय गणना के साथ रंगा जाता है। दोनों तरफ से बिल्कुल एक जैसी दिखने वाली इस रेशमी साड़ी को तैयार करने में कई महीनों का समय लगता है, जो पीढ़ियों तक अपनी बनावट और रंगों की चमक बनाए रखने के लिए विख्यात है।