पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजन जैसे इडली और डोसा का आधार प्राकृतिक किण्वन यानी फर्मेंटेशन पर टिका है। भीगे हुए चावल और उड़द की दाल को पीसकर रातभर रखने से प्राकृतिक सूक्ष्मजीव कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, जिससे बैटर फूल जाता है। यह प्राकृतिक प्रक्रिया बिना किसी कृत्रिम सामग्री के इडली को स्पंजी बनाती है और भोजन के पोषण मूल्य तथा सुपाच्यता को भी कई गुना बढ़ा देती है।